पटना. जाम, घना कोहरा और लंबी दूरी की यात्रा ये वह कुछ कारण हैं जिसने भारत की सबसे तेज ट्रेन के लांच को टाल दिया है। रेल मंत्रालय की मानें तो ट्रेन 18 को दिल्ली से वाराणसी की यात्रा पूरी करने में कम से कम आठ घंटे का समय लगेगा। अगर ऐसा होता है तो यह एक चेयर कार ट्रेन के लिए ज्यादा होगा।

ट्रेन 18 को 29 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से हरी झंडी दिखाने वाले थे मगर अब इस वह जंनवरी के पहले हफ्ते में इस ट्रेन की आधिकारिक शुरुआत करेंगे। साल 2018 में बनने के कारण इसे ट्रेन 18 का नाम दिया गया है।

रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त ने इसे 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने की अनुमति दे दी है। अब रेलवे बोर्ड इसकी आधिकारिक शुरुआत को अनुमति देगा जिसके बाद फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय भेजी जाएगी।

रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि अभी ट्रेन की शुरुआत में समय लगेगा और यह 2018 में संभव नहीं है। यह ट्रेन भारतीय रेल की छवि बदल देगी। यात्रियों को देखते हुए रुट का निर्धारण भी किया जाना है और लोग आठ घंटे से ज्यादा बैठना नहीं चाहेंगे। इस ट्रेन के किराए का निर्धारण भी किया जाना है और माना जा रहा है कि इसका किराया शताब्दी ट्रेनों से ज्यादा होगा।

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